वो व्यक्ति जिन्होंने मुझे Ayurveda की राह दिखाई 🙏
🙏 स्व. श्री Sreedharan जी की पुण्य स्मृति को समर्पित। उनके अमूल्य दस्तावेज़ उनकी धर्मपत्नी द्वारा,
उनके पुराने लेखों में से सहेजकर उपलब्ध कराए गए हैं।
In loving memory of Late Shri Sreedharan. His invaluable writings have been kindly preserved and shared by his wife.
Sreedharan जी ने मुझे सिखाया कि स्वास्थ्य कोई दवा की डिब्बी नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है — सही आहार, सही दिनचर्या और शरीर की नियमित "servicing"। उन्हीं के पास से मुझे एक पुरानी Ayurvedic Panchakarma पुस्तिका मिली, जिसके आधार पर आज भी हमारी site पर content तैयार होता है।
📖 उनकी मूल पुस्तिका download करें (Original Booklet PDF)
"A healthy body is a guest chamber for the soul; a sick body is a prison." — यही सोच Sreedharan जी हमेशा दोहराते थे।
मैं स्व. श्री Sreedharan जी से कम से कम 10 बार मिला हूँगा, और हर बार एक ही एहसास होता था — यह इंसान ज्ञान से भरा हुआ है। सच कहूँ तो उनकी आधी बातें उस वक़्त मेरे सिर के ऊपर से निकल जाती थीं, मुझे समझ ही नहीं आती थीं — लेकिन उनका इलाज एकदम सटीक (bang on) होता था। ज्ञान इतना गहरा था कि उसे शब्दों में पूरा पकड़ पाना मेरे बस की बात ही नहीं थी।
जो बात मुझे सबसे ज़्यादा छू गई वो था उनका स्वभाव। वे कभी पैसे की बात नहीं करते थे — दे दो तो ठीक, न दो तो भी ठीक। इलाज उनके लिए सेवा थी, धंधा नहीं। और इस पूरे सफर में उनकी धर्मपत्नी हमेशा साथ रहीं — उन्हीं के साथ काम करते-करते वे खुद भी एक expert बन गईं, और इतनी कोमल हृदय (kind-hearted) महिला मैंने कम ही देखी हैं। अफ़सोस कि मैं आज तक उनका नाम नहीं जानता, पर उनका अपनापन कभी नहीं भूलूँगा।
आज FreeAyurveda.com के पीछे जो प्रेरणा है, वो इन्हीं की देन है। यह पेज मेरी ओर से उन्हें एक छोटी सी श्रद्धांजलि है। 🙏
ये अमूल्य दस्तावेज़ आज हमारे पास इसलिए हैं क्योंकि स्व. श्री Sreedharan जी की धर्मपत्नी ने इन्हें सहेजकर रखा। वे अब केरल (Kerala) में रहती हैं और घर पर computer न होने के बावजूद, उनके पुराने लेख घर से computer centre तक ले जाकर मुझ तक भेजती हैं — सिर्फ़ इसलिए कि उनके पति का ज्ञान सबके काम आ सके। इतनी बड़ी और नेक सोच के लिए मैं उनका तहे दिल से आभारी हूँ।
वे दिल्ली को बहुत याद करती हैं — Sreedharan जी बहुत साल पहले यहाँ आ बसे थे, और उनका ज़्यादातर जीवन दिल्ली में ही बीता। जैसे-जैसे उनके और दस्तावेज़ मुझ तक पहुँचेंगे, मैं उन्हें यहाँ सबके ज्ञान के लिए जोड़ता रहूँगा — यह सिलसिला उन्हीं की कृपा से चलता रहेगा। 🌿