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मेरे Ayurveda गुरु — स्व. श्री S.B. Sreedharan जी (Late Shri S.B. Sreedharan)

वो व्यक्ति जिन्होंने मुझे Ayurveda की राह दिखाई 🙏

🙏 स्व. श्री Sreedharan जी की पुण्य स्मृति को समर्पित। उनके अमूल्य दस्तावेज़ उनकी धर्मपत्नी द्वारा, उनके पुराने लेखों में से सहेजकर उपलब्ध कराए गए हैं।
In loving memory of Late Shri Sreedharan. His invaluable writings have been kindly preserved and shared by his wife.

श्री Sreedharan जी — Ayurveda mentor स्व. श्री S.B. Sreedharan जी (Late Shri S.B. Sreedharan) — केरल
हर journey के पीछे कोई एक इंसान होता है जो दिशा बदल देता है। मेरी Ayurveda की यात्रा के पीछे वो इंसान हैं — श्री S.B. Sreedharan जी (केरल)। उन्हीं की प्रेरणा और मार्गदर्शन से मैंने Ayurveda को करीब से समझा, अपनाया, और आगे चलकर FreeAyurveda.com की नींव रखी ताकि यह ज्ञान सबके लिए मुफ़्त और आसान भाषा में उपलब्ध हो।

संक्षिप्त परिचय (Introduction)

स्व. श्री S.B. Sreedharan जी मूल रूप से केरल (Kerala) से थे और कई दशक पहले दिल्ली आ बसे थे। राजधानी में रहते हुए उन्होंने लगभग चार दशक तक Ayurvedic चिकित्सा की। उनकी सबसे बड़ी पहचान थी नाड़ी परीक्षा (Nadi Pariksha / pulse diagnosis) में महारत — वे सिर्फ़ कलाई की नाड़ी छूकर, दो उंगलियों के बीच रोग की गहराई तक पहुँच जाते थे और फिर प्रतिविधि (उपाय) बताते थे। मलयाली समुदाय और दिल्ली के अनेक मरीज़ों के बीच वे एक भरोसेमंद वैद्य के रूप में जाने जाते थे। उन्हीं के मार्गदर्शन में मैंने Ayurveda सीखा — और यही प्रेरणा FreeAyurveda.com की नींव बनी।

मलयाला मनोरमा (Metro Manorama, दिल्ली) में S.B. Sreedharan पर feature, 2 जून 2012
📰 मलयाला मनोरमा (Metro Manorama, दिल्ली संस्करण), 2 जून 2012 — “തൊട്ടറിയുന്നു, തലസ്ഥാനത്തിന്റെ നാഡിമിടിപ്പ്” (“छूकर पहचान लेते हैं — राजधानी की नाड़ी की धड़कन”): चार दशकों से दिल्ली में नाड़ी से इलाज करने वाले मलयाली वैद्य S.B. Sreedharan पर feature।

🎥 Asianet News के कार्यक्रम IndiaGate में डॉ. S.B. Sreedharan पर segment (6 जून 2012, Part 2)।

उनसे क्या सीखा

Sreedharan जी ने मुझे सिखाया कि स्वास्थ्य कोई दवा की डिब्बी नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है — सही आहार, सही दिनचर्या और शरीर की नियमित "servicing"। उन्हीं के पास से मुझे एक पुरानी Ayurvedic Panchakarma पुस्तिका मिली, जिसके आधार पर आज भी हमारी site पर content तैयार होता है।

📖 उनकी मूल पुस्तिका download करें (Original Booklet PDF)

"A healthy body is a guest chamber for the soul; a sick body is a prison." — यही सोच Sreedharan जी हमेशा दोहराते थे।

कुछ यादें

Kunwer का सोच

मैं स्व. श्री Sreedharan जी से कम से कम 10 बार मिला हूँगा, और हर बार एक ही एहसास होता था — यह इंसान ज्ञान से भरा हुआ है। सच कहूँ तो उनकी आधी बातें उस वक़्त मेरे सिर के ऊपर से निकल जाती थीं, मुझे समझ ही नहीं आती थीं — लेकिन उनका इलाज एकदम सटीक (bang on) होता था। ज्ञान इतना गहरा था कि उसे शब्दों में पूरा पकड़ पाना मेरे बस की बात ही नहीं थी।

जो बात मुझे सबसे ज़्यादा छू गई वो था उनका स्वभाव। वे कभी पैसे की बात नहीं करते थे — दे दो तो ठीक, न दो तो भी ठीक। इलाज उनके लिए सेवा थी, धंधा नहीं। और इस पूरे सफर में उनकी धर्मपत्नी हमेशा साथ रहीं — उन्हीं के साथ काम करते-करते वे खुद भी एक expert बन गईं, और इतनी कोमल हृदय (kind-hearted) महिला मैंने कम ही देखी हैं। अफ़सोस कि मैं आज तक उनका नाम नहीं जानता, पर उनका अपनापन कभी नहीं भूलूँगा।

आज FreeAyurveda.com के पीछे जो प्रेरणा है, वो इन्हीं की देन है। यह पेज मेरी ओर से उन्हें एक छोटी सी श्रद्धांजलि है। 🙏

उनकी धर्मपत्नी के प्रति आभार 🙏

ये अमूल्य दस्तावेज़ आज हमारे पास इसलिए हैं क्योंकि स्व. श्री Sreedharan जी की धर्मपत्नी ने इन्हें सहेजकर रखा। वे अब केरल (Kerala) में रहती हैं और घर पर computer न होने के बावजूद, उनके पुराने लेख घर से computer centre तक ले जाकर मुझ तक भेजती हैं — सिर्फ़ इसलिए कि उनके पति का ज्ञान सबके काम आ सके। इतनी बड़ी और नेक सोच के लिए मैं उनका तहे दिल से आभारी हूँ।

वे दिल्ली को बहुत याद करती हैं — Sreedharan जी बहुत साल पहले यहाँ आ बसे थे, और उनका ज़्यादातर जीवन दिल्ली में ही बीता। जैसे-जैसे उनके और दस्तावेज़ मुझ तक पहुँचेंगे, मैं उन्हें यहाँ सबके ज्ञान के लिए जोड़ता रहूँगा — यह सिलसिला उन्हीं की कृपा से चलता रहेगा। 🌿